देशी - विदेशी की जगह लूटेरों का विरोध हो.…
देश में लोगों का एक बड़ा समूह है जो देशी चीजों का समर्थन और विदेशी चीजों का बहिष्कार का समर्थन करते हैं। वे हिंदुस्तान यूनीलीवर, कोक , पेप्सी , ग्लैक्सो , नेस्ले आदि अनेक कंपनियों के उप्ताद का उपयोग न करने की प्रेरणा देते हैं।
कभी मैं उनसे पूरी तरह सहमत था और देशी कंपनियों की हिमायत करता था. अब समझ का दायरा थोडा विस्तृत हुआ तो लगा कि ऐसा करना पूरी तरह ठीक नहीं है।
अब लगता है कि विरोध उनका हो जिन्होंने लूट मचा राखी है। १० पैसे के सामान को १० रूपये में बेचने वाले लूटेरों का बहिष्कार तो होना ही चाहिए।स्वदेशी आंदोलन वाले थोडा गौर फरमाएंगे।
कई विदेशी कंपनियों के कारण आज भारत में जीवनरक्षक दवाएं बाजार में नाममात्र के मूल्य में उपलब्ध हैं , देशी कंपनियों ने कई ख़ास दवाओं के मूल्य सरकारी नियंत्रण में आते ही या तो उनका उत्पादन बंद कर दिया या फार्मूला चेंज कर दिया।
आज भी SUPRADN नाम की विटामिन की गोली लगभग १ रुपये में उपलब्ध है जो की देश में बिकने वाली १५ रुपये प्रति टैबलेट / कैप्सूल तक की दर से बिकने वाले सभी ब्रांड्स से बेहतर है।
देश में लोगों का एक बड़ा समूह है जो देशी चीजों का समर्थन और विदेशी चीजों का बहिष्कार का समर्थन करते हैं। वे हिंदुस्तान यूनीलीवर, कोक , पेप्सी , ग्लैक्सो , नेस्ले आदि अनेक कंपनियों के उप्ताद का उपयोग न करने की प्रेरणा देते हैं।
कभी मैं उनसे पूरी तरह सहमत था और देशी कंपनियों की हिमायत करता था. अब समझ का दायरा थोडा विस्तृत हुआ तो लगा कि ऐसा करना पूरी तरह ठीक नहीं है।
अब लगता है कि विरोध उनका हो जिन्होंने लूट मचा राखी है। १० पैसे के सामान को १० रूपये में बेचने वाले लूटेरों का बहिष्कार तो होना ही चाहिए।स्वदेशी आंदोलन वाले थोडा गौर फरमाएंगे।
कई विदेशी कंपनियों के कारण आज भारत में जीवनरक्षक दवाएं बाजार में नाममात्र के मूल्य में उपलब्ध हैं , देशी कंपनियों ने कई ख़ास दवाओं के मूल्य सरकारी नियंत्रण में आते ही या तो उनका उत्पादन बंद कर दिया या फार्मूला चेंज कर दिया।
आज भी SUPRADN नाम की विटामिन की गोली लगभग १ रुपये में उपलब्ध है जो की देश में बिकने वाली १५ रुपये प्रति टैबलेट / कैप्सूल तक की दर से बिकने वाले सभी ब्रांड्स से बेहतर है।
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