Sunday, April 6, 2014

एलआइसी करवाने वालों जरा गौर करना ...

आपने २-५-१०-१५ लाख की एलआइसी करवाई हो जो जरा गौर करना।  २५-३० साल का व्यक्ति ५ लाख की मनी बैक पालिसी लेता है - हर साल २५ से ३० हजार का प्रीमियम  भरता है।

कुछ बुरा हो जाए तो ५-७-८ लाख पीछे वाले को मिल जाते  है और कुछ बुरा नहीं होता है  तो २०-२५ साल बाद १५-२० लाख रूपये  मिल जाते है।

दोनों में आपका ठगे जा रहे हो।

इस महंगाई के ज़माने में ५ लाख से पीछे वाला क्या करेगा  ........... और बीस साल बाद २५ लाख का वही  महत्व होगा जो आज एक लाख का है। झोले में रूपये लेकर जाओगे और जेब में सामान लेकर आओगे।

अब बोलोगे कि क्या करना ठीक रहेगा?

देखो , कम से कम ५० लाख का टर्म प्लान लो साल के ८-१० हजार लगेंगे।  और जो बचे उसका गोल्ड ईटीएफ या लार्ज कैप म्यूच्यूअल फण्ड ले लो।  कुछ बुरा हो गया तो पचास लाख पीछे वाले को मिल गए और कृपा बनी रही तो पच्चीस साल बाद मालामाल।

मेरी मानो तो मनी बैक पालिसी हो तो सरेंडर कर दो, फायदे में रहोगे।  और हाँ कुछ भी नहीं लिया हो तो देर न करो क्योंकि कल किसने देखा है।  

तीस से ऊपर वाले ध्यान देंगे !!

३० के हो गए - तो साल में एक बार तनिक अच्छे से सेहत का लेवल पता कर लें।
शुगर और प्रेशर कब चुपके से  बढ़ जाएगा - पता ही नहीं चलेगा। हर दस में ४-५ लोग चपेट में आ चुके हैं - यह मैंने कई कैम्प्स लगाने के बाद अनुभव किया है।  आज टाइम हो तो ठीक नहीं तो कल सुबह दो चीज तो जंचा लीजिये।  

देशी - विदेशी की जगह लूटेरों का विरोध हो.…

देशी  - विदेशी  की जगह लूटेरों का विरोध हो.…

देश में लोगों का एक बड़ा समूह है जो देशी चीजों का समर्थन और विदेशी चीजों का बहिष्कार का समर्थन करते  हैं।  वे हिंदुस्तान यूनीलीवर, कोक , पेप्सी , ग्लैक्सो , नेस्ले आदि अनेक कंपनियों के उप्ताद का उपयोग न करने की प्रेरणा देते हैं।

कभी मैं उनसे पूरी तरह सहमत था  और देशी कंपनियों की हिमायत करता  था. अब समझ का दायरा थोडा विस्तृत हुआ तो लगा कि ऐसा करना पूरी तरह ठीक नहीं है।

अब लगता है कि विरोध उनका हो जिन्होंने लूट मचा राखी है।  १० पैसे के सामान को १० रूपये में बेचने वाले लूटेरों का बहिष्कार तो होना ही चाहिए।स्वदेशी आंदोलन वाले थोडा गौर फरमाएंगे।

कई विदेशी कंपनियों के कारण आज भारत में जीवनरक्षक दवाएं बाजार में नाममात्र के मूल्य में उपलब्ध हैं , देशी कंपनियों ने कई ख़ास दवाओं के मूल्य  सरकारी नियंत्रण में आते ही या तो उनका उत्पादन बंद कर दिया या फार्मूला चेंज कर दिया।

आज भी SUPRADN नाम की विटामिन की गोली लगभग १ रुपये में उपलब्ध है जो की देश में बिकने वाली १५ रुपये प्रति टैबलेट / कैप्सूल तक   की दर से बिकने वाले  सभी ब्रांड्स से बेहतर है।